Chhattisgarh khabar 24
बारनवापारा वनांचल क्षेत्र में गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाया गया
दिनांक 21/07/2024 को गुरु
पूर्णिमा के पावन अवसर पर "जय सिंघा ध्रुवा सेवा समिति" के द्वारा सिंघा ध्रुवा गढ़ के भूमका पुजारी गुरुदेव तिरुमाल मंगतू जगत जी,गुरु माता जी के निज निवास पाड़ादाह (बारनवापारा) के गोंडवाना भवन में गुरु पर्व मनाया गया जिसमें धर्म गुरु पाहंदी पारी कुपार लिंगो, राज गुरु शंभू सेक, 13 मुठवा लिंगो,12 चेला, 18 पाठ पुरखा शक्ति, देवगन गुरु, भूरा भगत, धनवंतरी को हूम, धुप,दीप से सेवा अर्जी कर गोंडवाना के जीव जगत के वैचारिक, मानसिक एकता बनी रहे, समाज के स्वाभिमान एवं सम्मान लिए विनय, मिन्नते किया गया साथ ही साथ प्रत्येक गोत्रावली पाठ को भी याद किया गया जिसे 16,87,18 पाठ कहते है। इस अवसर गुरुदेव मंगतु जगत जी ने बताया कि गोंडवाना कि गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसमे राजा _राजगुरु शंभु महादेव द्वारा प्रपादित जनकल्याण निहित त्रैगुण्य मार्ग स्थापित किया है, साथ ही धर्म गुरु पाहंदी पारी कुपार लिंगों ने सतज्ञान प्राप्त करके अध्यात्मिक दर्शन, प्राकृतिक दर्शन, तत्व दर्शन, समाजिक दर्शन, जय सेवा दर्शन का हम समस्त गोंडवाना को प्रकृति धर्म का ज्ञान कराया, जिसमे मानव जीवन कल्याण के लिए समाजिक कुरीतियों को खत्म कर, संगठात्मक समाजिक संरचना में, शारीरिक अंग, मानसिक अंग, और बौद्धिक अंग से पाठ पुरखा शक्ति, प्रकृति शक्ति , सुसंस्कारित, सुसंगठित समाजिक शक्ति का साधना एवं सेवा करना ही सतकर्म है।
कालांतर से आज तक हमारे लोग अन्य धर्मों के शिकार हो गयें है, जो हमारे समाज के लिए खतरनाक एवं हानिकारक है,
सच्चे मन, वचन, कर्म, से छलकपट को त्याग कर तथा निस्वार्थ भाव से समाजिक संरचना के साथ हमारे महान विभुतियों,शंभु महादेव एवं लिगों संस्कृति को पुरखों एवं गोंडवाना कि ऐतिहासिक महापुरुषों की बनायें हुए मार्ग पर अनुशरण कर चलने की आवश्यकता है। व आगे बताया कि गोड़वाना समाज पहले चार संभाग में फैला हुआ था,और उसमें मुख्य गढ़ राज्य भी शामिल थे। जिसमें पहला संभाग उम्मोगुटटाकोर में 15 गढ़ राज्य, दुसरा एंरुगगुटटाकोर में 18 गढ़ राज्य, तीसरा सैमालगुट्टाकोर में 22 गढ़ राज्य, चौथा अयफोकागुटटाकोर में 19 गढ़ राज्य थे। और इस गढ़ राज्य के राजा प्रजा को उस समय उनके टोटम से जाना था,और आगे चलकर इन्हीं गोंड समाज ने पुरे देश में राज्य किया। जो आज भी सभी ऐतिहासिक किताबों में देखने को मिलता हैं। उन्होंने अपनें वक्तव्य में आगे बताया कि सिंघा धुर्वा समिति के पास दो महाशक्ति के स्थल है, जिसे आज पुरा देश जानता हैं। और वह हैं प्राचीन चांदा दाई गोंड गुफा, सिंघा धुर्वा गढ़। आज समाज को रुढ़ी प्रथा परम्परा संस्कृति को आगे बढ़ाने के साथ साथ पुरे प्रदेश में गोड़ समाज को आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक चेतना जागृत लाने के लिए समिति के जिला अध्यक्ष एवं ब्लाक अध्यक्ष को तेजी से काम करने के निर्देश दिए। इस गुरु पूर्णिमा में समिति से जिला बलौदाबाजार, रायपुर, दुर्ग, भिलाई, गरियाबंद,महासमुन्द धमतरी, बिलासपुर एवं मुंगेली से गोंड समाज के आलावा अन्य समाज के मातृ शक्ति, पितृ शक्ति, युवा युवती शक्तियां सम्मिलित हुए !



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