उक्त प्रकरण की गंभीरता के मद्देनजर रायपुर पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा द्वारा शुरूआत से ही लगातार दिशा निर्देश दिये जा रहे थे। साथ ही पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा के कुशल निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी कसडोल कौशल किशोर वासनिक के कुशल नेतृत्व में निरीक्षक प्रवीण मिंज, सायबर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रणाली वैद्य की अहम भूमिका रही। प्रदेश के बहुचर्चित 08 व्यक्तियों की सुनियोजित हत्या एवं हत्या के प्रयास का मामला पुलिस टीम द्वारा कड़ी पूछताछ और सूक्ष्मता से जांच करने पर सच्चाई सामने आई। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौत की गुत्थी सुलझाने में सफलता हासिल की है।
पुलिस पूछताछ के बाद आरोपी ने कबूला
बद्री पटेल (मौत 6 फरवरी) - आरोपी को गाली-गलौज करता था इसलिए शराब में जहर मिलाकर पिलाया।
बुठालु साहु (मौत 20 फरवरी) - समाज को गाली देने और पिछले चुनाव में हुए विवाद को लेकर बदले की भावना से की गई थी हत्या।
छत्तु साहु (मौत 12 मार्च) - आरोपी के पत्नी पर बुरी नजर रखने के संदेह में हत्या को अंजाम दिया।
बुधराम जायसवाल (मौत 20 मार्च) - जमीन विवाद और सामाजिक रंजिश के चलते शराब में चूहे मारने की दवा मिलाकर पिलाया गया था।
विनोद कुमार साहु (मौत 31 मार्च) - अपमान और गाली-गलौज का बदला लेने के मकसद से कर दी हत्या।
गजानंद मांझी (मौत 28 अप्रैल) - आरोपी को संदेह था कि वह उस पर बैगा-गुनिया और टोना-टोटका करता है।
चैतुराम साहु (मौत 29 अप्रैल) - आरोपी ने मृतक से 50 हजार रुपए का कर्ज लिया था जिसे चुकाने से छुटकारा पाने के लिए घटना को अंजाम दिया।
महेतरू राम साहु (मौत 14 मई) - पुरानी चुनावी रंजिश और ताने मारने की बात को लेकर की गई थी हत्या।
इसके अलावा आरोपी रामसहाय जायसवाल ने कार्तिक कुम्हार को भी शराब में चूहे मारने की दवा (सुहागा) मिलाकर पिलाई थी, लेकिन समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच गई। आरोपी पर 8 हत्या और एक हत्या का प्रयास करने का मामला दर्ज किया है।

