महासमुंद, 15 जुलाई 2026:
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करों और शिकारियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। विभाग ने साही (इंडियन पॉर्कुपाइन) के अवैध शिकार के मामले में तत्परता दिखाते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वन्यजीव संरक्षण अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई में शिकार किए गए वन्यजीव का मांस भी बरामद किया गया है। सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
आरक्षित वन क्षेत्र में हुआ था शिकार
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वनमंडलाधिकारी मयंक पाण्डेय के मार्गदर्शन एवं उपवन मंडलाधिकारी गोविंद सिंह के कुशल नेतृत्व में वन परिक्षेत्र बागबाहरा की टीम को क्षेत्र में अवैध शिकार होने की गोपनीय सूचना मिली थी।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी नवीन वर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तत्काल रैताल बीट के आरक्षित वन क्षेत्र के कक्ष क्रमांक-154 में दबिश दी, जहां बारीकी से जांच करने पर साही (पॉर्कुपाइन) के शिकार होने की अधिकारिक पुष्टि हुई।
आपस में बांट लिया था साही का मांस
मामले की गहराई से जांच और स्थानीय स्तर पर पूछताछ के दौरान ग्राम नवाडीह (खम्हरिया) के पांच ग्रामीणों की इस संलिप्तता का खुलासा हुआ। वन विभाग की टीम ने जब संदेही आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
वन विभाग के अधिकारी के अनुसार: "आरोपियों ने साही का शिकार करने के बाद उसके मांस को टुकड़ों में काटकर आपस में बांट लिया था, जिसे टीम ने बरामद कर लिया है।"
वन अपराध दर्ज, आरोपी भेजे गए जेल
आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने के बाद वन विभाग ने उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 22666/05 (दिनांक 13 जुलाई 2026) दर्ज किया। बुधवार को सभी पांचों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र के शिकारियों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी गई है और अवैध गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जा रही है।




