मुख्य आरोपियों को भगाने में वन अमले की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़):
बलौदाबाजार वनमंडल का देवपुर परिक्षेत्र एक बार फिर वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके मांस की तस्करी को लेकर सुर्खियों में है। परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम मेटकुला में करंट प्रवाहित तार बिछाकर एक जंगली सूअर के शिकार का गंभीर मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे वन अमले ने कार्रवाई के नाम पर आनन-फानन में जंगली सूअर के शव को जंगल में ही जलवा दिया, जबकि मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर फरार होने का मौका दे दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय बीट गार्ड और मैदानी वनकर्मियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
खेत में बिछाया था मौत का जाल, बिजली के तार से किया शिकार
मिली जानकारी के मुताबिक, बीते बुधवार (23 सितंबर 2026) को देवपुर वन परिक्षेत्र के मेटकुला निवासी किसान उपेन्द्र साहू के खेत में शिकारियों द्वारा हाईटेंशन लाइन से जीआई तार जोड़कर करंट का जाल बिछाया गया था। इस घातक फंदे की चपेट में आने से एक जंगली सूअर की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। ग्रामीणों द्वारा मामले की सूचना स्थानीय वन अमले को दी गई। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने औपचारिकता निभाते हुए पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की।
साक्ष्य नष्ट करने की जल्दबाजी, जंगल में ही जला दिए शव
घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान सामने आया कि वन अमले ने शव के निपटान में असामान्य जल्दबाजी दिखाई। मृत वन्यजीव को जंगल के भीतर ही जला दिया गया, जिसके अवशेष मौके पर साफ देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले को दबाने और साक्ष्य कमजोर करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब घटना की पुख्ता जानकारी और नामजद सुराग मिल चुके थे, तब भी नामजद दोनों मुख्य आरोपियों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
आरोपियों को 'सेफ पैसेज' देने का आरोप; जमानत की सेटिंग की चर्चा
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि वन विभाग के कुछ मैदानी कर्मचारियों की मिलीभगत से दोनों आरोपियों को पहले ही सतर्क कर फरार करा दिया गया है। जानकारों के अनुसार, यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत आरोपियों को तब तक गिरफ्तारी से बचाया जाता है जब तक वे सक्षम न्यायालय से अग्रिम जमानत हासिल न कर लें या सीधे कोर्ट में सरेंडर न कर दें। इस तरह चालान पेशी के समय औपचारिकता पूरी कर विभाग अपनी पीठ थपथपा लेता है और मुख्य शिकारी सलाखों के पीछे जाने से बच जाते हैं।
सक्रिय है शिकार और मांस तस्करी का सिंडिकेट
नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि देवपुर वन परिक्षेत्र में जीआई तार के फंदे, जहरखुरानी और अवैध बिजली कनेक्शन के जरिए वन्यजीवों के शिकार का संगठित सिंडिकेट फल-फूल रहा है।
- गश्त का अभाव: बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर स्तर के अधिकारियों द्वारा अपने निर्धारित बीट क्षेत्रों में नियमित रात्रि गश्त नहीं की जा रही है।
- मिलीभगत के आरोप: ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम है कि शिकारियों के गिरोह से कुछ कर्मियों की साठगांठ रहती है, जिसके एवज में न केवल अवैध वसूली होती है बल्कि शिकार किए गए मांस का हिस्सा भी बांटा जाता है।
- जिम्मेदारों की अनदेखी: रक्षक की भूमिका में तैनात कर्मचारियों की शिथिलता के कारण बेजुबान वन्यजीव लगातार काल के गाल में समा रहे हैं।
खबर लिखे जाने तक आरोपी फरार
घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी वन अमला आरोपियों को दबोचने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। क्षेत्र में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर मेटकुला बीट के जिम्मेदार कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका की निष्पक्ष जांच कराएंगे, या फिर यह मामला भी हमेशा की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा।


